"हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे,
हरे राम, हरे राम, राम राम हरे हरे,"
कृष्ण शब्द का भावार्थ -
"कृष्ण" शब्द दो अक्षरो से निर्मित है -
कृष्- जिसका अर्थ है भगवान का आकर्षक पक्ष
ण - जो दिव्य आनंद की ओर संकेत करता है.
"हरे कृष्ण,हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे,
हरे राम, हरे राम, राम राम हरेहरे,"
इस मंत्र का भावार्थ इस प्रकार है -
हरे-हरे का अर्थ है हरा अर्थात राधा जो अपने निरुतम प्रेम व स्नेह से हरिका मन हर लेती है.
कृष् - कृष् का अर्थ है आकर्षित करना.
ण - ण का अर्थ है परमनन्द कृष्ण , परमानन्द का मूर्त रूप है.
रा - रा का अर्थ है पापों को दूर भगाना.
म - म का अर्थ है एक बंद द्वार जो पापों को पुनः प्रवेश करने से रोकता है,
राम का अर्थ है दिव्यरति लीला के भगवान जो सदैव अपनी नित्य प्रेयसी राधा जी के संग रमण करते है.
लोग प्रायः यह प्रश्न करते है कि इस हरे कृष्ण मंत्र का क्या अर्थ है.
हरे कृष्ण मंत्र के जप का अर्थ है -
तत्काल कृष्ण का प्रत्यक्ष संग करना.
यदि हम बिना किसी अपराध के हरे कृष्ण मंत्र का जप करे तो हम तत्काल कृष्ण के संपर्क में आ जाते है.
महा मंत्र के आधार भूत अर्थ -
हरे-श्री राधा रानी (भगवान की दिव्य शक्ति )
कृष्ण - सर्वकर्षक परम पुरुषोत्तम भगवान.
राम - भगवान कृष्ण जो आनंद के भंडार है.
(श्री कृष्ण का एक नाम राधा रमण है अर्थात राधा रानी को आनंद देने वाले)
हरी बोल लगे ना मोल जय श्री राधे कृष्णा !!
बोलो जय जय श्री राधा रमण वृन्दावन बिहारी लाल की जय !!
हरे राम, हरे राम, राम राम हरे हरे,"
कृष्ण शब्द का भावार्थ -
"कृष्ण" शब्द दो अक्षरो से निर्मित है -
कृष्- जिसका अर्थ है भगवान का आकर्षक पक्ष
ण - जो दिव्य आनंद की ओर संकेत करता है.
"हरे कृष्ण,हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे,
हरे राम, हरे राम, राम राम हरेहरे,"
इस मंत्र का भावार्थ इस प्रकार है -
हरे-हरे का अर्थ है हरा अर्थात राधा जो अपने निरुतम प्रेम व स्नेह से हरिका मन हर लेती है.
कृष् - कृष् का अर्थ है आकर्षित करना.
ण - ण का अर्थ है परमनन्द कृष्ण , परमानन्द का मूर्त रूप है.
रा - रा का अर्थ है पापों को दूर भगाना.
म - म का अर्थ है एक बंद द्वार जो पापों को पुनः प्रवेश करने से रोकता है,
राम का अर्थ है दिव्यरति लीला के भगवान जो सदैव अपनी नित्य प्रेयसी राधा जी के संग रमण करते है.
लोग प्रायः यह प्रश्न करते है कि इस हरे कृष्ण मंत्र का क्या अर्थ है.
हरे कृष्ण मंत्र के जप का अर्थ है -
तत्काल कृष्ण का प्रत्यक्ष संग करना.
यदि हम बिना किसी अपराध के हरे कृष्ण मंत्र का जप करे तो हम तत्काल कृष्ण के संपर्क में आ जाते है.
महा मंत्र के आधार भूत अर्थ -
हरे-श्री राधा रानी (भगवान की दिव्य शक्ति )
कृष्ण - सर्वकर्षक परम पुरुषोत्तम भगवान.
राम - भगवान कृष्ण जो आनंद के भंडार है.
(श्री कृष्ण का एक नाम राधा रमण है अर्थात राधा रानी को आनंद देने वाले)
हरी बोल लगे ना मोल जय श्री राधे कृष्णा !!
बोलो जय जय श्री राधा रमण वृन्दावन बिहारी लाल की जय !!
No comments:
Post a Comment