में औरत हूँ
में प्यार करती हूँ
मनुहार करती हूँ
में पालनहार हूँ
पर गुहार भी करती हूँ
में सृजन जानती हूँ
पर विनाश भी करती हूँ
संसार रचती हूँ
इसलिए जननी हूँ
में सत्य हूँ, सुंदर हूँ, सहनशील हूँ
में ही माँ हूँ , बेटी हूँ, बहिन हूँ
और तुम्हारी प्रिय (पत्नी) भी
तुम कहते हो
में यौवन और श्रंगार हूँ
लेकिन
में स्रष्टि हूँ, जगत जननी हूँ
में सम्पूर्ण हूँ और मुझे गर्व हैं की
में औरत हूँ..
मेरा अपमान न करो..
मेरे बिना इस संसार की हर चीज अधूरी हैं.........राधे राधे राधे राधे....
में प्यार करती हूँ
मनुहार करती हूँ
में पालनहार हूँ
पर गुहार भी करती हूँ
में सृजन जानती हूँ
पर विनाश भी करती हूँ
संसार रचती हूँ
इसलिए जननी हूँ
में सत्य हूँ, सुंदर हूँ, सहनशील हूँ
में ही माँ हूँ , बेटी हूँ, बहिन हूँ
और तुम्हारी प्रिय (पत्नी) भी
तुम कहते हो
में यौवन और श्रंगार हूँ
लेकिन
में स्रष्टि हूँ, जगत जननी हूँ
में सम्पूर्ण हूँ और मुझे गर्व हैं की
में औरत हूँ..
मेरा अपमान न करो..
मेरे बिना इस संसार की हर चीज अधूरी हैं.........राधे राधे राधे राधे....
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