Wednesday, August 7, 2013

~तुलसी का महत्व~

~तुलसी का महत्व~ 

एक सच्ची घटना है-एक बार एक हिन्दू ने एक मुस्लिम के गले मे तुलसी की माला देखी तो उनसे माला धारण का कारण पूँछा 

तो उन्होने बताया कि एक बार मै गाँव से बाहर जा रहा था तो जंगल मे मुझे एक पेङ के नीचे दो बङे आकार के आदमी दिखे तो मै देखकर डरने लगा 

तो वे बोले डरो मत हम यमराज के दूत है और इस रास्ते से एक आदमी बैलगाङी से निकलने बाला है जिसकी गाङी टूटने से मौत हो जाएगी और उसके जीव को हम लेजायेगे, 

थोङी देर बाद ऐसा ही हुआ परंतु गाङी टूटने से वह रास्ते के किनारे पर गिरा जहाँ कयी झाङियाँ लगी थ उसकी म्रत्यु हो गयी अब यम के दूतो ने उस आदमी के जीव को ले जाने मे अपनी असमर्थता बताते हुये कहा कि इसके जीव को अब भगवान के दूत ले जायेगे

मैने पूँछा क्योँ तो उन्होने बताया कि जहाँ झाङियो मे वो मरा है वहा तुलसी जी का पोधा लगा है जो उसके शरीर से स्पर्श है॥

~कल्याण गीताप्रेस गोरखपुर~
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गले में तुलसी की माला धारण करने से जीवनशक्ति बढ़ती है, बहुत से रोगों से मुक्ति मिलती है।
तुलसी की माला पर भगवन्नाम-जप करना कल्याणकारी है।

मृत्यु के समय मृतक के मुख में तुलसी के पत्तों का जल डालने से वह सम्पूर्ण पापों से मुक्त होकर भगवान विष्णु के लोक में जाता है।

(ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खंडः 21.42)

तुलसी के पत्ते सूर्योदय के पश्चात ही तोड़ें।
दूध में तुलसी के पत्ते नहीं डालने चाहिए तथा दूध के साथ खाने भी नहीं चाहिए।
घर की किसी भी दिशा में तुलसी का पौधा लगाना शुभ व आरोग्यरक्षक है।

पूर्णिमा, अमावस्या, द्वादशी और सूर्य-सक्रान्ति के दिन, मध्याह्नकाल, रात्रि, दोनों संध्याओं के समय और अशौच के समय, तेल लगा के,नहाये धोये बिना जो मनुष्य तुलसी का पत्ता तोड़ता है, वह मानो भगवान श्रीहरि का मस्तक छेदन करता है।

(ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खंडः 21.50.51)

रोज सुबह खाली पेट तुलसी के पाँच- सात पत्ते खूब चबाकर खायें और ऊपर से ताँबे के बर्तन में रात का रखा एक गिलास पानी पियें।
इस प्रयोग से बहुत लाभ होता है।
यह ध्यान रखें कि तुलसी के पत्तों के कण दाँतों के बीच न रह जायें।

बासी फूल और बासी जल पूजा के लिए वर्जित है परंतु तुलसी दल और गंगाजल बासी होने पर भी वर्जित नहीं है।

(स्कंद पुराण, वै.खंड, मा.मा. 

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