Friday, March 27, 2009

बेहतर है की अब तेरी तसवीर सजा ले हम ;खाबों की इस तरह ही ताबीर बना ले हम ;बस चंद नसीब वाले दीदार तेरा पाते ;तसवीर को जब चाहें आँखों में बसा ले हम ;इनकार तेरा लेता है इम्तेहाँ हमारा ;तसवीर से जब चाहें इकरार करा ले हम ;

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